शनिवार, अगस्त 30, 2008

संकल्प

आओ कोलाहल को स्वर दें !
बिखरे भावों को शब्द,
शब्द को गीत,
गीत को लय दें।

वर्षा के जल को प्रवाह दें,
प्रवाह को दिशा ,
नदी को भगीरथ तट दें।

संशय भरे अनिश्चय को निष्ठा ,
निष्ठां को विश्वास ,
विश्वास को संकल्पित मन दें।

भटके लोगों को राह ,
राह को ध्येय ,
ध्येय तक बढ़ते पग दें ,
आओ कोलाहल को स्वर दें ।

प्रस्तुति : पवन कुमार अरविन्द
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