बुधवार, अप्रैल 08, 2009

स्वघोषित तंत्र ही प्रचंड का लोकतंत्र

नेपाली जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामचन्द्र राय से पवन कुमार अरविन्द की बातचीत
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नेपाल की राजनीति में मधेशी नेता के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले रामचन्द्र राय, 1981, 86 और 94 में नेपाल की संसद में सरलाही संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। 1991 में आरपीपी केन्द्रीय समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुके श्री राय 2004 में गिरिजा प्रसाद कोईराला के नेतृत्व वाली संयुक्त सरकार में भूमि सुधार एवं प्रबन्धन राय मन्त्री रहे हैं। सम्प्रति, नवम्बर, 2007 से नेपाली जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। पिछले सप्ताह द्वि-दिवसीय दौरे पर भारत आये श्री राय से दिल्ली में पवन कुमार अरविन्द ने बातचीत की। प्रस्तुत है इसके प्रमुख अंश :


OUE. प्रचण्ड के नेतृत्व वाली सरकार नेपाली जनता की अपेक्षाओं पर कहां तक खरा उतर पा रही है ?

ANS. सत्ता में आने के बाद प्रचण्ड सरकार ने नेपाली जनता की सारी अपेक्षाओं पर पानी फेर दिया है। यह सरकार जनता की आकांक्षाओं पर खरी नहीं उतर पा रही है। अभी हाल में माओवादियों ने काठमाण्डू शहर में दिनदहाड़े लूट-पाट करके तीन से अधिक लोगों को गोली मार कर मौत के घाट उतार दिया। इस सरकार में जनता को शांति और सुरक्षा की कोई अनुभूति नही है। माओवादियों के आतंक की दहशत आज भी नेपाली जनता में बरकरार है।


QUE. माओवादी आन्दोलन का लक्ष्य राजतन्त्र को हटाकर लोकतन्त्र की स्थापना करना था। सत्ता में आने के बाद प्रचण्ड क्या लोकतान्त्रिक रास्ते पर चल रहे हैं?

ANS. आन्दोलन के दौरान प्रचण्ड के भाषणों से ऐसा लग रहा था कि नेपाल अब पूर्ण लोकतान्त्रिक राय बन जायेगा, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं हुआ। राजतन्त्र से भी बदतर स्थिति नेपाल और नेपाली जनता की हो गयी है। प्रचण्ड के राय संचालन का जो तरीका है, वह देश के हित में नहीं है। प्रचण्ड, लोकतान्त्रिक रास्ते पर न चलकर, दबाव की राजनीति कर रहे हैं। सत्ता पर कब्जा करने के उद्देश्य से माओवादी, राजनीतिक नेताओं और जनसामान्य को डरा-धमका रहे हैं। प्रचण्ड के नेतृत्व में माओवादी देश पर एकाधिकार कर लेना चाहते हैं। लोकतन्त्र से उनका कोई सरोकार नहीं है। प्रचण्ड का स्वनिर्मित तन्त्र ही उनका अपना लोकतन्त्र है।


QUE. राजतन्त्र से लेकर लोकतन्त्र तक की यात्रा में, भारत-नेपाल सम्बन्धों पर क्या असर पडा है?

ANS. असर पडा है। नेपाल में भारत विरोधी गतिविधियों में वृध्दि हुई है। पहले सरकार भारत की ओर देखती थी, अब चीन की ओर देख रही है। सरकार की चीन से नजदीकी बढी है।


QUE. मठ-मन्दिरों की क्या स्थिति है?

ANS. धार्मिक कार्यों के प्रति सरकार का रवैया सहयोगात्मक नहीं है। मन्त्रिमण्डल द्वारा धार्मिक कार्यों के लिए दी जाने वाली आर्थिक सहायता बन्द कर दिया गया है। मठ-मन्दिरों की सम्पत्ति को हड़पने के उद्देश्य से माओवादी कार्यकर्ताओं द्वारा पुजारियों को अपमानित किया जा रहा है, जिससे कि वह राजीनामा के लिए बाध्य हो जायें। पशुपतिनाथ मन्दिर पुजारी विवाद भी इसी की एक कड़ी है।


QUE. पशुपतिनाथ मन्दिर पुजारी विवाद मामले में आपका क्या कहना है?

ANS. पशुपतिनाथ मन्दिर के परम्परागत दक्षिण भारतीय पुजारी सनातन परम्परा के प्रतीक हैं। जगद्गुरू शंकराचार्य के द्वारा सनातन धर्म के प्रसार व उत्थान के लिए किये गये प्रयासों के क्रम में, शिवक्षेत्र नेपाल में पशुपतिनाथ की स्थापना की गयी थी। शिव पुराण के अनुसार, केदारनाथ से लेकर वर्तमान काठमाण्डू तक भगवान का एक ही विग्रह है, जिसका सिर काठमाण्डू में और पैर केदारनाथ में है। इसलिए द्वादश योतिर्लिगों के दर्शन के साथ पशुपतिनाथ का दर्शन, दर्शन की पूर्णता के लिए अनिवार्य किया गया। कुल मिलाकर शंकराचार्य का प्रयास भारत और नेपाल की सांस्कृतिक एकता के लिए था। शंकराचार्य के समय से ही भारतीय पुजारियों का चयन होता रहा है। सत्ता में आने के बाद माओवादियों नें खासकर उन विषयों पर विवादों को जन्म दिया है, जो भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक सम्बन्धों के प्रतीक हैं। माओवादियों की इच्छा नेपाल की संस्कृति को पूरी तरह भ्रष्ट-नष्ट करने की है। सबसे खास बात यह है कि माआवादियों का ईसाईयों और मुसलमानों के साथ व्यवहार खराब नहीं है। मुसलमानों को हज करने के लिए 50% अनुदान अर्थात 1 लाख, 25 हजार रूपये प्रतिव्यक्ति देने की घोषणा सरकार कर चुकी है। नेपाल में 3.75% ईसाई और 2.5% मुसलमान हैं। सरकार ने मदरसा की शिक्षा को राष्ट्रीय शिक्षा में सम्मिलित करके मदरसा बोर्ड का गठन किया है। माओवादियों की प्रबल इच्छा अपने कार्यकर्ताओं को पुजारी के रूप में स्थापित करके हिन्दुत्व को समाप्त करना है।


QUE. मन्दिर मुद्दे पर प्रचण्ड सरकार का, क्या भारत विरोधी रूख उजागर नहीं होता?

ANS. उजागर होना स्वाभाविक ही है।


QUE. नेपाल के विकास के लिए सरकार का रवैया कैसा है?

ANS. विकास के लिए कोई सोच नहीं है। व्यापारियों को विस्थापित होने पर मजबूर किया जा रहा है। कल-कारखाने बन्द पडे हैं। व्यापार विनिमय घाटे में जा चुका है। देश में गरीबी बढ़ने के आसार बढ़ गये हैं। और जहां तक शिक्षा का प्रश्‍न है तो नेपाल में सांस्कृतिक शिक्षा का अभाव है। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था नेपाल के हित में नहीं है।


QUE. गरीबी बढ़ने के आसार क्यों बढ़ रहे हैं ?

ANS.नेपाल में गरीबी बढ़ने के कई कारण हैं। इनमें से एक कारण है, गरीबी उन्मूलन के लिए सरकार के पास ठोस नीति का अभाव है। दूसरा, आय-स्रोत का अधिकतम हिस्सा सेना पर खर्च हो रहा है। बहुत बड़ी सेना की आवश्यकता नहीं है। पहले 25 हजार सेना से ही काम चल जाता था, लेकिन अब 15 हजार प्रचण्ड की सेना भी जुड़ गयी है।
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