गुरुवार, अगस्त 06, 2009

2003 मुंबई विस्फोटःपोटा का सोटा

अखिर में पोटा का सोटा आतंकवादियों पर चल ही गया। मुझे बहुत खुशी हुई कि कोर्ट ने आतंकवादियों को फांसी की सज़ा सुनाई। मुंबई की एक विशेष पोटा अदालत ने वर्ष 2003 में हुए बम धमाकों के लिए दोषी पाए गए तीनों व्यक्तियों को मौत की सज़ा सुनाई दी। इससे पहले तीन अगस्त को तीनों अभियुक्तों मोहम्मद हनीफ़, उनकी पत्नी फ़हमीदा और एक अन्य अभियुक्त अशरत अंसारी को धमाकों की साजिश रचने, लोगों के बीच दहशत फैलाने और 54 लोगों की हत्या का दोषी करार दिया था। वर्ष 2003 में मुंबई के झवेरी बाज़ार इलाक़े और गेटवे ऑफ़ इंडिया के पास हुए दो विस्फोटों में 25 अगस्त को कम से कम 54 लोगों की मौत हो गई थी। धमाकों में 244 से ज़्यादा लोग घायल हो गए थे। पोटा की विशेष अदालत ने तीनों को पोटा की धारा 3 (2) और भारतीय दंड विधान की धारा 302 और 307 के तहत दोषी पाया था।
दुबई में बनी थी योजना
जिस दिन अदालत ने इन तीनों को दोषी पाया था तभी सरकारी वकील उज्जवल निकम ने कहा था कि इन लोगों के हाथ लश्कर-ए- तैय्यबा से जुड़े होने और दुबई में बैठकर इन धमाकों की साजिश रचने की बात साबित हो गई है। यह पहला मामला है जब किसी परिवार में पति, पत्नी और बेटी- तीनों ही एक चरमपंथी साजिश में शामिल पाए गए हैं। इस परिवार में जहाँ मोहम्मद हनीफ़ और उनकी पत्नी फहमीदा के ख़िलाफ़ मामला चलाया गया है, वहीं लड़की की आयु को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने उसपर पोटा क़ानून के तहत मामला न चलाने का फैसला लिया था। सरकारी वकील ने फ़ैसला आने के बाद मीडिया से बात करते हुए दोहराया है कि इन लोगों ने पाकिस्तान के कुछ लोगों से दुबई में मुलाक़ात की थी और वर्ष 2002 में दो दिसंबर के दिन एक बम विस्फोट की नाकाम कोशिश की थी। इसके बाद 28 जुलाई,03 को अभियुक्तों ने एक लोकल बस में बम विस्फोट किया, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई। लेकिन उस विस्फोट से हुए नुक़सान से ये आतंकी संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने एक बड़ी साजिश रच डाली, और 25 अगस्त, 03 को मुंबई धमाकों से दहल उठी। जिसमें 54 लोगों की मौत हो गई और 244 लोग घायल हो गए थे।.
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