शुक्रवार, नवंबर 07, 2008

"तुमको प्रणाम"

हे भारत के अग्रदूत ! हे कालजयी !
तुमको प्रणाम, है कोटि-नमन
शत-शत अभिनन्दन औ बंदन।
सूर्य-पुंज की तरह ज्योति छलकाने वाले
तन-मन-धन सबकुछ अर्पित कर
राष्ट्रसिंधू की धारा में मिल जाने वाले,
हे भारत के भाग्यविधाता !
जन-गन-मन के सच्चे त्राता
तुमको प्रणाम, है कोटि-नमन ---!!
हे भारतभूमि उद्धारक !
राष्ट्रध्वजा के सच्चे वाहक
देवभूमि औ ध्येयभूमि के सबल सुधारक
धर्मभूमि औ समरभूमि के अमर सहायक
महामुक्ति के कोकिल गायक
नवयुग नवजग राष्ट्र-विधायक
पुरे जग को पथ दिखलाने वाले ,
हे भारत के नायक !
तुमको प्रणाम, है कोटि नमन
शत-शत अभिनन्दन औ बंदन !!

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