मंगलवार, मई 25, 2010

विदेशों में भारतीय माटी की महक


भारत का अतीत ही गौरवशाली नहीं रहा बल्कि भविष्य भी गौरवशाली है। इसकी छटा समय-समय पर देखने और सुनने को मिलती रहती है।

यह भारत के माटी की ही विशेषता है कि भारतीयता में सराबोर भारतीय मूल के व्यक्ति जहां कहीं भी जाते हैं, अपनी पहचान का झंडा जरूर गाड़ते हैं।

शायद इसीलिए यह समाचार सुनकर कोई आश्चर्य नहीं हुआ कि भारतीय मूल की कमला प्रसाद बिसेसर कैरिबियाई देश त्रिनिदाद एण्ड टोबैगो की पहली महिला प्रधानमंत्री चुनी गई हैं।

यह पहला अवसर है जब कोई भारतीय मूल की महिला किसी देश के प्रधानमंत्री पद पर आसीन हुई है। हालांकि, इससे पहले फिजी और मॉरीशस में भारतीय मूल के नेता सर्वोच्च पद पर आसीन रह चुके हैं।

कमला ईश्वर में अपार विश्वास रखने वाली हिंदू महिला हैं। उन्होंने लॉ-स्कूल में टॉप करने के साथ-साथ वेस्टइंडीज विश्वविद्यालय से प्रबंधन किया है। इसके अलावा वह शिक्षा के क्षेत्र में डिप्लोमा भी कर चुकी हैं। वह देश में कई प्रमुख पदों पर काम कर चुकी हैं।

कमला के पूर्वज उन 148,000 भारतीय श्रमिकों में से एक रहे हैं, जो 1845 से 1917 के बीच कैरेबियाई द्वीपों पर गन्ने और कोकोआ के खेतों में काम करने के लिए लाए गए थे। त्रिनिदाद एवं टोबैगो की जनसंख्या 13 लाख है, जिसकी 44 फीसदी आबादी भारतीय है।

विपक्षी दल यूनाइटेड नेशन्स कांग्रेस (यूएनसी) की अध्यक्ष एवं पूर्व अटॉर्नी जनरल 58 वर्षीय कमला बिसेसर ने पिछले 13 साल से प्रधानमंत्री पद संभाल रहे पीपुल्स नेशनल मूवमेंट पार्टी के नेता पैट्रिक मैनिंग को आम चुनाव में पराजित किया है।

पैट्रिक ने हार स्वीकार कर ली है। वह 1997 से देश के प्रधानमंत्री थे, जबकि उनकी पार्टी चार दशक से भी अधिक समय से सत्ता में है। जानकारी के मुताबिक, देश में पिछले 10 साल में यह पांचवें चुनाव हुए हैं।

मैनिंग ने विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को टालने के लिए मध्यावधि चुनाव की घोषणा की थी। इससे पहले मैनिंग पर लगातार धन के दुरूपयोग और सार्वजनिक इमारतों के निर्माण पर अंधाधुंध खर्च के आरोप लगते रहे थे।

कमला के नेतृत्व में चुनाव लड़ने वाले राजनीतिक गठबंधन ने भारी बहुमत के साथ सत्तारूढ़ पार्टी के 43 वर्ष के शासन को खत्म किया है। कमला की पीपुल्स पार्टनरशिप पार्टी ने सोमवार को हुए मतदान में 41 में से 29 संसदीय सीटों पर कब्जा किया।

करीब तेरह लाख की जनसंख्या वाले छोटे देश त्रिनिदाद एण्ड टोबैगो में लगभग पचास प्रतिशत संख्या उन लोगों की है, जिनके पूर्वज उस समय भारत से वहां गए थे, जब यह देश ब्रिटेन के कब्जे में था।

1 टिप्पणी:

honesty project democracy ने कहा…

सुखद समाचार ,उम्दा प्रस्तुती /

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