बुधवार, अगस्त 11, 2010

‘प्रेम, करुणा और मानवता ही हिंदू धर्म की बुनियाद’


हॉलीवुड की प्रख्यात् अदाकार जूलिया रार्बट्स ने हिंदू धर्म अपनाकर एक बार फिर इस बहस को जन्म दे दिया है कि आखिर हिंदू धर्म है क्या चीज, किस बला का नाम है यह ..?
जूलिया को यह पूर्ण विश्वास है कि हिंदू धर्म से अगले जन्म में सुख और शांति की जिंदगी मिल सकेगी।

जूलिया ने कहा- 'मैं निश्चित तौर पर हिन्दू बन गई हूँ। इस जीवन में मेरे दोस्तों और परिवार ने मुझे जरूरत से ज्यादा बिगाड़ दिया है। अब मैं अपना अगला जन्म भी खराब नहीं करना चाहती और अगले जन्म में सुख व शांति से रहना चाहती हूं। इसलिए मैंने हिंदू धर्म अपनाया है।'

42 वर्षीय जूलिया के माता-पिता क्रमशः बैप्टिस्ट और कैथोलिक हैं। वह अपनी फिल्म 'ईट प्रे लव' की शूटिंग के लिए पहली बार भारत आई थीं। शूटिंग के दौरान उनको हिंदू धर्म को करीब से जानने-समझने का मौका मिला था। जिसके बाद उन्होंने हिन्दू धर्म स्वीकार कर लिया।

यही नहीं, धर्म परिवर्तन के बाद उन्होंने अपने बच्चों का नाम भी बदलकर हिंदू देवी-देवताओं के नाम पर रख दिया है।

जूलिया कहती हैं- ‘मैं अपने कैमरामैन पति डेनियल मोडर और तीन बच्चों हैजल, फिनायस और हेनरी के साथ भजन-कीर्तन तथा प्रार्थना करने के लिए नित्य-प्रति मंदिरों में जाती हैं और घंटों पूजा-अर्चना करती हूँ।’

वैसे, चाहे जो कुछ भी हो लेकिन हिंदू धर्म कितना पुराना है, यह कोई स्पष्ट नहीं बता सकता और न ही इसके संदर्भ में कोई प्रमाण या तथ्य ही मौजूद हैं।

हां, लेकिन इतना अवश्य कहा जाता है कि सृष्टि के प्रारम्भ से मानवों का जो स्वाभाविक कर्तव्य या कार्य-व्यवहार रहा है, उसी का आगे चलकर हिंदू धर्म नाम पड़ गया होगा। यानि जो कुछ भी स्वाभाविक है, प्रकृति के अनुकूल है और वैज्ञानिक दृष्टि से पूर्ण रूपेण विधिसम्मत है, उसको हिंदू धर्म कहा जा सकता है।

हालांकि ‘हिंदू’ शब्द की व्युत्पत्ति कैसे हुई, यह जानना ‘हिंदू धर्म’ को परिभाषित करने के लिए कोई मायने नहीं रखता। यह केवल सामान्य ज्ञान का विषय हो सकता है। क्योंकि केवल शब्द के आधार पर इसकी व्याख्या करने से लगता है कि इसकी परिभाषा के साथ न्याय नहीं हो रहा है और सब कुछ छूट सा जा रहा है।

यह ऐसा धर्म है जो हर स्थिति, परिस्थिति और मनःस्थिति में केवल और केवल मानवता व राष्ट्रीयता की वकालत करता है। इसलिए इसको राष्ट्रीयता का पूरक और मानवता का पर्यायवाची कहा जा सकता है। यह सृष्टि की सबसे उदार जीवन पद्धति है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने एक फैसले में इसको एक आदर्श जीवन पद्धति करार दिया है। यह हमें सामाजिक मानदण्डों के अंतर्गत हर तरह से आजादी प्रदान करता है।

हिंदू धर्म का लचीलापन ही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। इसमें कट्टरता का कहीं कोई स्थान नहीं है। यह देश, काल और परिस्थिति के अनुसार बदलाव करने की प्रेरणा देता है।

हिंदू धर्म व्यक्ति को किसी एक पुस्तक, एक मार्गदर्शक या एक पूजा-स्थल तक सीमित नहीं करता। यह हमें आज़ादी देता है कि हम अपनी सोच, अपनी सुविधा के अनुसार अपनी जीवन शैली और पूजा पद्धति का चयन करें। यह लचीलापन ही है, जो हिंदुत्व को चिर-पुरातन होते हुए भी नित्य-नूतन बनाए रखता है।

हिंदू धर्म की समीचीन व्याख्या ना तो मैं कर सकता हूं और ना ही आप....। इसका केवल एक ही कारण है कि इसकी विशालता की कोई आखिरी सीमा नहीं है। जहां आप अंत मानते हैं, वहां पहुंचेंगे तो ऐसा प्रतीत होता है कि अभी आगे बहुत कुछ और भी है।

अब इसके आगे केवल इतना ही कहा जा सकता है कि...... जूलिया रार्बट्स ने हिंदू धर्म अपनाकर एक बार फिर इस बात को साबित किया है हिंदू धर्म ना सिर्फ पुरातन धर्म है बल्कि भटके हुए और शांति की तलाश कर रहे लोगों का अंतिम पड़ाव भी....।

1 टिप्पणी:

त्यागी ने कहा…

bahut badhai aapko itne detail men likhne ke liye.
aur julia robart ji ko bhi badhai hindu dharm swikaar karne ke liye

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