गुरुवार, मई 12, 2011

'कुरूक्षेत्र' बना ग्रेटर नोयडा का भट्टा पारसौल गांव

ग्रेटर नोयडा का भट्टा पारसौल गांव इन दिनों उत्तर प्रदेश के राजनीतिक महाभारत का कुरूक्षेत्र बना हुआ है। इस महाभारत में कौरवों का पक्ष कौन है, यह पहचानना बड़ा ही कठिन है, क्योंकि सभी अपने को पाण्डव होने का ही दावा कर रहे हैं। सभी राजनीतिक दलों के नेता इस कुरूक्षेत्र में पहुंचकर केवल ‘अग्निबाण’ चलाने पर आमादा हैं। इस मामले के हल से उनका कुछ भी लेना देना नहीं। केवल अगले चुनाव में वोट का जुगाड़ हो जाय, इस महाभारत का एकमेव लक्ष्य है।

असली महाभारत तो कौरवों और पाण्डवों के बीच हुआ था, लेकिन वर्तमान का यह राजनीतिक महाभारत केवल कौरवों के बीच ही होता दिख रहा है। क्योंकि जिस प्रकार इस आंदोलन के सहारे पार्टियों में राजनीतिक बढ़त पाने की होड़ मची हुई है, उससे केवल यही उपमा समीचीन है। यहां न कोई पाण्डव है और न ही कोई कृष्ण, जो अर्जुन को गीता का उपदेश देकर धर्मपथ पर चलते हुए कर्मक्षेत्र में डटे रहने के लिए प्रेरित करे। सबको ऐन-केन-प्रकारेण ‘हस्तिनापुर’ की सत्ता ही दिख रही है। बस, वही लक्ष्य है। किसानों का दुःख-दर्द जाये भाड़ में।

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